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IT सेक्टर में खतरे की बड़ी घंटी ! क्यों TCS एक झटके में 12,000 कर्मचारियों को निकालेग ?

TCS ने एक झटके में 12,000 कर्मचारियों को निकाला!


भारत की सबसे बड़ी IT सेवा कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने लगभग 12,000 कर्मचारियों को कंपनी से हटाने का निर्णय लिया है, जो कि इसके वैश्विक कर्मचारियों का लगभग 2% हिस्सा है। जुलाई 2025 में की गई यह घोषणा कंपनी के लगभग 60 वर्षों के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी छंटनी मानी जा रही है।

यह कदम क्यों उठाया गया?

TCS के CEO के. कृतिवासन ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय कंपनी को एक “भविष्य-तैयार संगठन” में बदलने की रणनीति का हिस्सा है। इस रणनीति का मकसद आंतरिक प्रतिभा को आधुनिक डिलीवरी मॉडल के अनुसार ढालना है, जो कि अब फुर्तीले (Agile), डिजिटल कुशल और AI-आधारित कार्यप्रणालियों पर आधारित हैं।

हालांकि AI के प्रभाव से उत्पादकता में बढ़ोतरी हुई है, फिर भी यह छंटनी केवल तकनीकी कारणों से नहीं की गई है, बल्कि यह कौशल असंतुलन और बदलती क्लाइंट अपेक्षाओं का परिणाम है। छंटनी का सबसे अधिक असर मिड और सीनियर मैनेजमेंट पर पड़ा है, खासकर उन लोगों पर जो पारंपरिक सेवा मॉडल से जुड़े हुए थे।

प्रभावित कर्मचारियों को क्या मिलेगा?

TCS ने प्रभावित कर्मचारियों के लिए निम्नलिखित सहायता प्रदान करने की बात कही है:

  • नोटिस अवधि और वित्तीय मुआवजा,
  • कुछ समय के लिए स्वास्थ्य बीमा की सुविधा,
  • करियर काउंसलिंग और पुनःस्थापन सहायता।

कंपनी का उद्देश्य इस कठिन समय में अपने कर्मचारियों को यथासंभव सहारा देना है।

TCS में पहले कब हुई थी छंटनी?

TCS आमतौर पर अपनी स्थिर नौकरी नीतियों के लिए जाना जाता है, लेकिन 2012 में कंपनी ने करीब 2,500 कर्मचारियों को प्रदर्शन आधार पर निकाला था। हालांकि वह घटना सीमित थी और इसके बाद कंपनी ने इतने बड़े पैमाने पर कोई छंटनी नहीं की थी।

इसलिए, 2025 की छंटनी न केवल रणनीतिक बदलाव का संकेत है, बल्कि कंपनी की पारंपरिक “कर्मचारी-प्रथम” नीति से भी एक बड़ा मोड़ है।

व्यापक परिदृश्य

यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर IT सेवाओं की मांग में धीमापन आया है। कंपनियाँ अब खर्च में कटौती कर रही हैं और ऑटोमेशन और AI टूल्स को प्राथमिकता दे रही हैं। इसी के तहत, TCS ने भी अपनी आंतरिक नीति में बदलाव करते हुए कम से कम 225 बिलेबल कार्यदिवस अनिवार्य किए हैं, और बेंच समय को सीमित कर दिया है।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि AI टूल्स और लो-कोड प्लेटफॉर्म्स के उपयोग ने कार्य डिलीवरी की परिभाषा को ही बदल दिया है। इससे बड़ी टीमों की आवश्यकता कम हो रही है, और छोटी, कुशल, मल्टी-स्किल्ड टीमों की माँग बढ़ रही है।

TCS और टाटा ग्रुप कितना बड़ा है?

TCS न केवल भारत की सबसे बड़ी IT कंपनी है, बल्कि यह विश्व की सबसे मूल्यवान टेक कंपनियों में से एक है, जिसके पास 600,000 से अधिक कर्मचारी हैं जो 50+ देशों में फैले हुए हैं। यह टाटा ग्रुप का एक प्रमुख हिस्सा है, जो भारत का सबसे प्रतिष्ठित और विविध व्यवसाय समूह है। टाटा समूह स्टील, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा, उपभोक्ता उत्पाद, दूरसंचार और एविएशन जैसे 100 से अधिक व्यवसायों में काम करता है और 100+ देशों में उसकी उपस्थिति है। TCS इस समूह की सबसे बड़ी आय और ब्रांड वैल्यू देने वाली इकाई है।

बाजार और उद्योग की प्रतिक्रिया

घोषणा के बाद TCS के शेयरों में लगभग 2% की गिरावट देखी गई। हालांकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारतीय IT सेक्टर के एक बड़े बदलाव की शुरुआत है, जहां अब केवल संगठन का आकार मायने नहीं रखता, बल्कि अनुकूलता और तकनीकी दक्षता असली ताकत बन रही है।

निष्कर्ष

12,000 से अधिक कर्मचारियों को अलविदा कहने का TCS का यह निर्णय शायद कठिन है, लेकिन तकनीकी दुनिया में बदलती वास्तविकताओं के अनुकूल रहने के लिए यह जरूरी भी है। जैसे-जैसे डिजिटल रूपांतरण और AI की भूमिका बढ़ रही है, IT कंपनियों को भी अपने आप को समय से पहले ढालना पड़ रहा है।

यह कदम अन्य IT कंपनियों के लिए भी एक संकेत हो सकता है कि भविष्य में नवाचार और कुशलता ही सफलता की कुंजी

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